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General Knowledge: भारत में क्रेडिट स्कोर कितने नंबर का होता है?

General Knowledge: आज के समय में अगर आप घर लेने का सोच रहे हैं, गाड़ी खरीदना चाहते हैं, बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं या क्रेडिट कार्ड बनवाना चाहते हैं, तो बैंक सबसे पहले एक चीज़ देखता है—आपका क्रेडिट स्कोर। कई लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि यह कोई नंबर होता है, लेकिन यह नंबर कैसे बनता है, कितना सही माना जाता है और क्यों यह आपकी आर्थिक इज़्ज़त जैसा होता है, यह बहुत कम लोग समझते हैं। गाँव-देहात में तो कई लोग यह भी नहीं जानते कि उनका भी कोई स्कोर बनता है। इसलिए यहाँ पूरे संदर्भ के साथ, आसान भाषा में, 10 सवाल–जवाब दिए जा रहे हैं ताकि बात पूरी तरह साफ़ हो जाए।

प्रश्न 1. भारत में क्रेडिट स्कोर कितने नंबर का होता है?
Answer:
भारत में क्रेडिट स्कोर आमतौर पर 300 से 900 के बीच होता है। यानी सबसे कम 300 और सबसे ज़्यादा 900। अगर आपका स्कोर 750 से ऊपर है, तो उसे अच्छा माना जाता है। 800 या 850 के ऊपर का स्कोर बहुत मजबूत समझा जाता है। 900 के करीब स्कोर बहुत कम लोगों का होता है, लेकिन जो लोग हर भुगतान समय पर करते हैं, उनका स्कोर धीरे-धीरे ऊपर जाता है।

प्रश्न 2. 900 के करीब स्कोर का क्या मतलब होता है?
Answer:
अगर किसी व्यक्ति का स्कोर 900 के आसपास है, तो इसका मतलब है कि उसने कभी भी EMI या क्रेडिट कार्ड का भुगतान लेट नहीं किया। बैंक ऐसे लोगों को भरोसेमंद मानते हैं। ऐसे लोगों को लोन जल्दी मिल जाता है और ब्याज दर भी कम लगती है। यह एक तरह से बैंक की नजर में आपकी अच्छी छवि होती है।

प्रश्न 3. 750 से कम स्कोर होने पर क्या दिक्कत आती है?
Answer:
अगर स्कोर 750 से नीचे है, तो बैंक थोड़ा सतर्क हो जाते हैं। 650 से नीचे स्कोर होने पर लोन मिलने में परेशानी आ सकती है। बैंक या तो लोन मना कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज दर लगा सकते हैं। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि स्कोर 750 से ऊपर बना रहे।

प्रश्न 4. क्रेडिट स्कोर बनता कैसे है?
Answer:
आपने जो भी लोन लिया, उसे समय पर भरा या नहीं, क्रेडिट कार्ड का बिल पूरा चुकाया या नहीं, कितनी बार लोन के लिए आवेदन किया—इन सब बातों को जोड़कर स्कोर बनता है। अगर आप बार-बार लोन के लिए आवेदन करते हैं या भुगतान में देरी करते हैं, तो स्कोर नीचे जाता है। समय पर भुगतान करना सबसे बड़ी चीज़ है।

प्रश्न 5. क्रेडिट स्कोर कौन तैयार करता है?
Answer:
भारत में कुछ कंपनियाँ हैं जो यह स्कोर बनाती हैं, जैसे CIBIL, Experian, Equifax और CRIF High Mark। इनमें CIBIL का नाम सबसे ज़्यादा सुना जाता है। बैंक इन्हीं कंपनियों की रिपोर्ट देखकर फैसला करते हैं कि आपको लोन देना है या नहीं।

प्रश्न 6. अगर किसी का स्कोर 300 के पास हो तो क्या होता है?
Answer:
300 के आसपास का स्कोर बहुत खराब माना जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति ने पहले लोन का भुगतान ठीक से नहीं किया या खाते में बड़ी गड़बड़ी रही है। ऐसे में बैंक लोन देने से साफ मना भी कर सकते हैं। यह स्थिति आर्थिक रूप से कमजोर छवि दिखाती है।

प्रश्न 7. बिना लोन लिए भी क्या स्कोर बनता है?
Answer:
अगर आपने कभी लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया, तो आपका स्कोर बनता ही नहीं। इसे “नो क्रेडिट हिस्ट्री” कहा जाता है। बैंक ऐसे लोगों को भी थोड़ा जोखिम वाला मानते हैं, क्योंकि उनके पास पुराना रिकॉर्ड नहीं होता कि यह व्यक्ति पैसा समय पर लौटाता है या नहीं।

प्रश्न 8. खराब स्कोर को कैसे सुधारा जा सकता है?
Answer:
अगर स्कोर खराब हो गया है, तो उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन समय लगता है। समय पर EMI भरना, क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल चुकाना, एक साथ कई लोन के लिए आवेदन न करना और पुराने बकाया साफ़ करना—इनसे धीरे-धीरे स्कोर ऊपर आता है। यह एक दिन का काम नहीं, बल्कि आदत बदलने का काम है।

प्रश्न 9. क्रेडिट स्कोर कितनी बार अपडेट होता है?
Answer:
क्रेडिट स्कोर हर महीने अपडेट हो सकता है। जैसे ही आपकी नई भुगतान जानकारी दर्ज होती है, स्कोर में थोड़ा-बहुत बदलाव आ सकता है। इसलिए एक छोटी गलती भी असर डाल सकती है और एक अच्छा भुगतान भी फायदा दे सकता है।

प्रश्न 10. क्रेडिट स्कोर को आर्थिक इज़्ज़त क्यों कहा जाता है?
Answer:
आज बैंक आपको आपके कपड़ों या बातों से नहीं, बल्कि आपके स्कोर से पहचानते हैं। अगर स्कोर अच्छा है, तो बैंक भरोसा करते हैं कि आप पैसा वापस करेंगे। इसलिए क्रेडिट स्कोर आपकी आर्थिक पहचान जैसा है। जितना अच्छा स्कोर, उतना आसान लोन, कम ब्याज और ज्यादा भरोसा। इसीलिए समझदार लोग इसे संभालकर रखते हैं।

Disclaimer:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। क्रेडिट स्कोर से जुड़े नियम और मानक समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित बैंक या आधिकारिक स्रोत से सही जानकारी अवश्य लें।

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